विशेष पिछड़ी भुंजिया जनजाति के लोग अभी भी मुलभुत सुविधा के आभाव में जीवन गुजारने मजबूर

 

 

ओंकार शर्मा,गरियाबंद:  जिला मुख्यालय गरियाबंद से महज लगभग 20-25 किलोमीटर दूर ग्राम पीपरछेड़ी से एक किलोमीटर दूर भुंजियापारा में पिछले तीन चार पिढ़ीयों में विशेष पिछड़ी भुंजिया जनजातीय के लोग निवासरत हैं। जहां आज भी कई समस्याओं से जुझते हुए जीवन गुजारने मजबूर नजर आते हैं। सबसे बड़ी समस्या वहां सड़क की है जहां बारिश के दिनों में चार पहिया तो दुर दो पहिया वाहन बड़ी मुश्किल से पहुंचता है। जहां मार्ग में पुलिया नहीं होने के चलते बारिश में बंद हो जाता है वहीं दुसरा मार्ग में रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत सड़क निर्माण हुआ था जिसे एक कृषक के द्वारा जेसीबी से सड़क के आधा भाग को खुदाई कर दिया गया है जिससे ये मार्ग बाधित हो जाता है। वहीं ग्रामीणों की मानें तो बारिश के दिनों में 108और 102 वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाता है और मरीज को खाट या किसी अन्य साधन से डालकर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है।

वहीं हम पेयजल की बात करें तो सौर ऊर्जा सिस्टम तो लगा है पर सालों से खराब पड़ा है वहीं एक नलकूप है जिसमें गर्मी के दिनों में पानी कम हो जाता है जिसके चलते एक कृषक के नीजी बोर से पानी उपयोग कर काम चलाना पड़ता है। गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में कार्यकर्ता नहीं होने से पिछले लगभग एक सालों से आंगनबाड़ी केंद्र बंद पड़ा है। साथ ही गांव में सार्वजनिक कार्यक्रम या बैठने उठने हेतु एक भी रंगमंच भवन नहीं होने के चलते ग्रामवासी अपने से चंदा इकट्ठा कर एक रंगमंच का निर्माण किये हैं जिनकी अभी छबाई व पुताई होना बाकि है। कई विशेष पिछड़ी भुंजिया जनजाति के लोगों को अभी तक आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया है पुराने कच्चे मिट्टी के घर टुटने लगा है जिसमें पोलीथीन लगाकर रहने मजबूर हैं।

ग्रामीणों की मानें तो जिले के आलाधिकारियों से जनप्रतिनिधियों तक अपनी समस्याओं को दूर करने आवेदन सौंप चुके हैं लेकिन अभी तक समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। वहीं सरकार इन विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए कई योजनाएं संचालित कर करोड़ों रुपए खर्च करती है पर धरातल पर आज भी इन जनजातियों की स्थिति कुछ और ही बयां करती है।

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